कोच और प्रतिभागियों ने जताई निराशा, कहा-पांच पूड़ी में पेट कैसे भरें | Coach and participants expressed disappointment, said – how to fill stomach in five puris


प्रतापगढ़4 घंटे पहले

प्रतापगढ़ में राज्य स्तरीय तीरंदाजी प्रतियोगिता की मेजबानी इस बार प्रतापगढ़ जिले को दी गई है। यहां करीब 500 प्रतियोगी अपने कोचों के साथ आए हुए हैं। इन प्रतियोगियों को प्रतियोगिता स्थल पर संचालित इंदिरा रसोई में खाना खिलाया जा रहा है। सोमवार को जब भास्कर ने प्रतियोगियों को खिलाए जाने वाले खाने की पड़ताल की तो चौंकाने वाले तथ्य देखने को मिले।

इंदिरा रसोई में सोमवार को दाल, मूली की सब्जी, चावल और पूड़ी बनाई गई थी। इंदिरा रसोई के बाहर खाना खा रहे प्रतियोगियों से खाने की गुणवत्ता के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि दाल के नाम पर सिर्फ पानी है। मूली और उसके पत्तों की सब्जी को उबालकर दिया गया है। पूड़ी भी पांच ही दी जा रही है।

इंदिरा रसोई में सोमवार को दाल, मूली की सब्जी, चावल और पूड़ी बनाई गई थी। इंदिरा रसोई के बाहर खाना खा रहे प्रतियोगियों से खाने की गुणवत्ता के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि दाल के नाम पर सिर्फ पानी है।

प्रतियोगियों ने बताया कि खाने के नाम पर महज दिखावा किया जा रहा है। इसके चलते वे बाहर से दही भी लाए लेकिन पांच पूड़ियों से पेट कैसे भरें। रविवार को भी खाना सही होने के कारण परेशान होकर बाहर होटल पर खाने को मजबूर होना पड़ा। गौरतलब है कि राज्य स्तरीय तीरंदाजी प्रतियोगिता में कुल 404 प्रतियोगी भाग ले रहे हैं। इनमें 277 छात्र तथा 126 छात्राएं हैं। इसके अलावा 83 टीम प्रभारी हैं।

इंदिरा रसोई कार्मिकों द्वारा एक खाने की प्लेट के 10 रुपए वसूले गए और रसीद भी नहीं दी गई। जब कार्मिक से इसके बारे में पूछा गया तो कहा कि प्रतियोगिता के चलते तीन चार दिन के लिए ऊपर से 10 रुपए लेने के आदेश आए हैं। मशीन खराब होने के कारण रसीद नहीं दी जा रही है।

जानिए किसने क्या कहा
हनुमानगढ़ से आए प्रतियोगी सुरेंद्र ने बताया कि दाल में पानी के सिवा कुछ नहीं है। ऐसी दाल कभी नहीं खाई जिसमें दाल ही नहीं हो। इतना ही नहीं 8 रुपए के स्थान पर 10 रुपए लिए गए।

अलवर से आए कोच हेतराम ने बताया कि एक थाली के 10 रुपए लिए गए और रसीद भी नहीं दी गई। इसके अलावा दाल के नाम पर पानी परोसा गया है।

हनुमानगढ़ से आई सुखवीर कौर ने बताया कि दाल में पानी ही पानी है। मूली की सब्जी में मिर्च मसाला नहीं है और उबालकर दी गई है।
अलवर से आए कोच रूपचंद जाटव ने कहा कि 10 रुपए और रसीद नहीं नहीं दिए जाने के अलावा मूली की जो सब्जी दी गई है वह पहली बार खाई है। ऐसी सब्जी जीवन में नहीं खाई जो मात्र उबालकर दी गई है।

बीकानेर से आए प्रतियोगी आलोक चौपड़ा ने बताया कि ऐसा खाना मिलेगा सोचा भी नहीं था। पानी वाली दाल और 5 पूड़ी के 10 रुपए वसूले गए। रसीद भी नहीं दी। संचालक पर कार्रवाई होनी चाहिए।

यह है नियम
खाने की व्यवस्था टीम प्रभारी स्वयं के स्तर पर करते हैं। टीम खिलाड़ियों को स्कूल से पैसा मिलता है। जिस स्कूल से प्रतियोगी आते हैं उस स्कूल के फीसए बजटए छात्र कोष से प्रति छात्र एक दिन के 150 रुपए दिए जाते हैं। इसमें टीम प्रभारी अपने स्तर पर खर्च करता है।

इनका कहना है
मैंने अधिकारियों से कह दिया है कि इतने छात्रों के खाने की व्यवस्था मैं नहीं कर सकता। मशीन खराब होने के कारण रसीद नहीं दी जा रही है। यदि कार्मिक द्वारा 10 रुपए लिए गए हैं तो उसे 8 रुपए लेने के लिए पाबंद किया जाएगा। खाने की गुणवत्ता में सुधार किया जाएगा।
प्रवीण राठौड, संचालक, इंदिरा रसोई

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