फैकल्टी के लिए नियम और शर्तें ऐसी, समाधान होना मुश्किल | Such are the terms and conditions for the faculty, it is difficult to solve


जयपुर6 मिनट पहले

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राजस्थान में 29 एग्रीकल्चर कॉलेज शुरू कर दिए गए। लेकिन अधिकतर में मूलभूत सुविधाएं ही नहीं हैं।

प्रदेश में 23 जनवरी से कुछ कृषि विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं शुरू हो गईं। लेकिन सवाल यह है कि बिना बेसिक सुविधाओं के राज्य में शुरू हुए 29 कृषि महाविद्यालयों और एग्रीकल्चर स्टूडेंट्स का भविष्य क्या होगा। अधिकतर कॉलेज ग्राम पंचायतों की ओर से दी गई एक दो कमरों की इमारतों में चल रहे हैं। फैकल्टी के लिए सरकारी सेवा से रिटायर्ड पेंशनधारियों को ही पढ़ाने के लिए पात्र माना गया है, ऐसे में स्टूडेंट्स को फैकल्टी भी नहीं मिल पाई। अब एग्रीकल्चर में करियर बनाने की उम्मीद लेकर स्टूडेंट्स परीक्षा दे रहे हैं।

देश में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, दिल्ली (आईसीएआर) की ओर से कृषि क्षेत्र में यूजी, पीजी, पीएचडी और पोस्ट डॉक्टरेट की शिक्षा के लिए कुछ मापदंड तय किए गए हैं। कृषि शिक्षा के लिए इन गाइडलाइंस का पालन करना जरूरी है।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, दिल्ली (आईसीएआर)

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, दिल्ली (आईसीएआर)

राजस्थान कृषि विभाग की ओर से यूजी के पाठ्यक्रम में बीएससी ऑनर्स एग्रीकल्चर चार साल का डिग्री कोर्स कराया जा रहा है। इससे डिग्री धारी को ग्रीन प्लस के साथ कृषि चिकित्सक की मान्यता मिलती है। इस क्षेत्र में करियर की अपार संभावनाएं हैं।

राजस्थान में 5 कृषि यूनिवर्सिटी

राजस्थान में 5 कृषि विश्वविद्यालय हैं। इनमें महाराणा प्रताप यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी उदयपुर, एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी जोधपुर, एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी कोटा, श्रीकर्ण नरेंद्र एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी जोबनेर जयपुर और स्वामी केशवानंद एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी बीकानेर शामिल हैं।

इसके अलावा इन यूनिवर्सिटी से संबद्ध सरकारी व अन्य प्राइवेट कृषि महाविद्यालय कृषि शिक्षा दे रहे हैं। कई प्राइवेट यूनिवर्सिटी में भी कृषि संकाय खोले गए हैं जहां यूजी, पीजी और पीएचडी शिक्षा दी जा रही है। डीम्ड यूनिवर्सिटीज में भी कृषि कोर्स उपलब्ध हैं।

महाराणा प्रताप यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी उदयपुर।

महाराणा प्रताप यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी उदयपुर।

हर साल होता है जेईटी एग्जाम

इन सभी कॉलेज में राजस्थान सरकार की ओर से यूजी में एडमिशन के लिए 12वीं के बाद जेईटी (जॉइंट एंट्रेंस टेस्ट) हर साल आयोजित होता है। कक्षाओं में एक बैच में 60 छात्र होते हैं। साल 2022-23 के सत्र में अगस्त-सितंबर में राजस्थान सरकार के शिक्षा आयुक्तालय के तहत 29 नए सरकारी एग्रीकल्चर कॉलेज आनन-फानन में खोल दिए गए। इनमें इस सत्र में 60-60 छात्रों को प्रवेश दिया गया। लेकिन इन छात्रों को पढ़ाने के लिए स्टाफ पर्याप्त नहीं है। न बिल्डिंग हैं, न लैब हैं, न फील्ड यूनिट हैं, न लाइब्रेरी, न हॉस्टल और न ही अलग से सुविधाएं। ग्राम पंचायतों के लेवल पर ही एक-दो कमरों की व्यवस्था कर एग्रीकल्चर कॉलेज शुरू कर दिए गए।

ये सभी 29 कॉलेज अलग अलग कृषि यूनिवर्सिटी से सम्बद्ध हैं। इनमें कालांश (पीरियड) बेस्ड फैकल्टी लगाई गई हैं। फैकल्टी की संख्या भी एक-दो ही है। जबकि एग्रीकल्चर कोर्स में 11 विषय होते हैं। 23 जनवरी से शुरू हुए एग्जाम में छात्रों अपनी मेहनत से ही उतरे हैं।

एग्रीकल्चर स्टूडेंट्स के एग्जाम 23 जनवरी से शुरू हो चुके हैं।

एग्रीकल्चर स्टूडेंट्स के एग्जाम 23 जनवरी से शुरू हो चुके हैं।

हाई क्वालिफाई ह्यूमन रिसोर्स की जरूरत

इन कॉलेज में फैकल्टी के लिए हाई क्वालिफाई ह्यूमन रिसोर्स की जरूरत है। संसाधनों की जरूरत है। फुल टाइम फैकल्टी की जरूरत है। लेकिन राज्य सरकार ने इन कॉलेज में फैकल्टी के लिए कुछ शर्तें रख दी हैं। इन शर्तों में फैकल्टी का सरकारी रिटायर्ड पेंशनर होने की पात्रता है। ऐसे में हायर क्वालिफाइड, अनुभवी पात्र लोगों को फैकल्टी के तौर पर मौका नहीं मिल पा रहा है। इनमें कई ऐसे हैं जिन्हें कृषि शिक्षा के क्षेत्र में 20 से 30 साल का अनुभव है। लेकिन वे इन कॉलेज में फैकल्टी नहीं लग सकते क्योंकि सरकारी नियमों के अनुसार वे अपात्र हैं।

फैकल्टी के लिए हटाए जाएं नियमों के बैरियर

अब मांग की जा रही है कि छात्र हित में इन बैरियर को हटाया जाए। पात्र सभी लोगों को फैकल्टी के तौर पर लगाया जाए। इन्हें पीरियड बेस्ड काम न देकर फुल टाइम फैकल्टी बनाया जाए। एक-दो पीरियड की बाध्यता खत्म की जाए। कम से कम एक फैकल्टी को 3-4 पीरियड तक पढ़ाने की छूट दी जाए। इन फैकल्टी के लिए मंथली फिक्स्ड मानदेय तय किया जाए। जब तक रेगुलर भर्ती न हो, फैकल्टी व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए।

डिप्टी डायरेक्टर जनरल का पत्र- राजस्थान निचले पायदान पर

भारत सरकार के आईसीएआर के डिप्टी डायरेक्टर जनरल (कृषि शिक्षा) ने एक महीने पहले ही राजस्थान सरकार को पत्र लिखकर अवगत कराया कि पूरे भारत में कृषि शिक्षा के क्षेत्र में राजस्थान सबसे निचले पायदान पर है।

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