3 दिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन भजन संध्या में बही भक्ति की धारा | On the first day of the 3-day program, the stream of devotion was recorded in Bhajan Sandhya.


मथुराएक घंटा पहले

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वृंदावन शोध संस्थान के 55 वें स्थापना दिवस कार्यक्रम के अवसर पर मंच पर मौजूद अतिथि

मथुरा के वृंदावन में स्थित वृंदावन शोध संस्थान का 3 दिवसीय स्थापना दिवस कार्यक्रम विविध धार्मिक कार्यक्रमों के साथ शुरू हुआ। स्थापना दिवस के पहले दिन मुंबई के प्रसिद्ध भजन गायक द्वारा गाए गए भजनों के चलते माहौल भक्तिमय हो गया। कार्यक्रम का शुभारंभ स्मृति व्याख्यान से शुरू हुआ।

55 वें स्थापना दिवस का हुआ आयोजन

वृंदावन शोध संस्थान के ऑडिटोरियम में तीन दिवसीय 55वें स्थापना दिवस समारोह का शुभारंभ विविध धार्मिक अनुष्ठान के मध्य हुआ। जिसके अंतर्गत गोपाल सहस्रनाम पाठ, व्याख्यान एवं भजन संध्या आदि कार्यक्रम आयोजित किये गये। मुंबई से आए सुप्रसिद्ध भजन गायक चरणजीत सिंह सोंधी एवं सहयोगियों द्वारा भजन संध्या का आयोजन किया गया। उनके सुंदर भजनों ने सभी लोगों का मन मोह लिया।

मुंबई से आए सुप्रसिद्ध भजन गायक चरणजीत सिंह सोंधी एवं सहयोगियों द्वारा भजन संध्या का आयोजन किया गया

मुंबई से आए सुप्रसिद्ध भजन गायक चरणजीत सिंह सोंधी एवं सहयोगियों द्वारा भजन संध्या का आयोजन किया गया

भगवान श्री कृष्ण हैं सर्वस्व व्याप्त

कार्यक्रम के दौरान सर्वप्रथम गोपाल मंदिर में वेदपाठी ब्राह्मणों द्वारा गोपाल सहस्रनाम का पाठ किया गया। इसके बाद ‘ब्रज संस्कृति राष्ट्रीय संदर्भ में’ विषय पर डॉक्टर रामदास गुप्त स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया गया। जिसके मुख्य वक्ता राजेन्द्र रंजन चतुर्वेदी ने कहा श्री कृष्ण समस्त भारत में व्याप्त हैं। वे भारत भाव रूप हैं। ब्रज की संस्कृति अखिल भारतीय समन्वय की संस्कृति है।

तत्कालीन कलेक्टर ने किया है अपनी पुस्तक में ब्रज संस्कृति का जिक्र

कार्यक्रम में आए अतिथि गोविंद कृष्ण पाठक ने बताया एफ एस ग्राउस के मथुरा-ए-डिस्ट्रिक्ट मेमोयर ग्रंथ में वृंदावन के संप्रदायों, मंदिरों एवं महत्वपूर्ण व्यक्तियों की चर्चा की हैैै। लगभग 100 पृष्ठों में उन्होंने यहां के बारे में जानकारी प्रदान की है। धर्माचार्य मनोज मोहन शास्त्री ने कहा ब्रज संस्कृति समस्त भारतीय संस्कृति में पिरोई हुई है। भगवान श्री कृष्ण की लीलायें राष्ट्रीय चेतना का आधार है।

वृंदावन शोध संस्थान

वृंदावन शोध संस्थान

भगवान बांके बिहारी के छवि चित्र पर किया गया माल्यार्पण

कार्यक्रम की अध्यक्षता रघुनाथ स्वामी द्वारा की गई। उन्होंने बताया कि रामानुज संप्रदाय के अनुसार वृंदावन गोकुल को दिव्यदेश की संज्ञा दी है। रमेश चंद्र शिशु द्वारा कार्यक्रम अध्यक्ष रघुनाथ स्वामी का संक्षिप्त परिचय दिया गया। संस्थान के निदेशक प्रवीण गुप्ता द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान बांके बिहारी के चित्रपट पर अतिथियों द्वारा माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।

अतिथियों का किया सम्मान

संस्थान के उप-निदेशक एस पी सिंह द्वारा अतिथियों को माल्यार्पण एवं पटुका उढ़ाकर स्वागत किया। भगवान दास शर्मा द्वारा मंगलाचरण किया गया। कार्यक्रम का संचालन डाॅ राजेश शर्मा द्वारा किया गया। कार्यक्रम के दौरान डाॅ उमेश चंद्र शर्मा, कपिल देव उपाध्याय, डाॅ चंद्र प्रकाश शर्मा, आचार्य वृंदावन बिहारी गोस्वामी, राजेश सेन, श्रीहित सुकृतलाल गोस्वामी, अशोक अज्ञ, मोहन लाल मोही, वसुंधरा पाठक, श्रीमती मालती शिशु, श्रीमती सुशीला गुप्ता, कन्हैया लाल शर्मा, बाल कृष्ण शर्मा, सपना शर्मा, हेमंत भारद्वाज, प्रियादत्त उपाध्याय, आदेश कुमार पांडेय, ईशा आचार्य, रेनू वर्मा, शिवानी भंडारी, अर्चिता उपाध्याय, नीतू, कृष्णा कुमारी, सीमा कुमारी, प्रियंका सिंह, काजल वर्मा, हेमलता छोंकर, सुधा, प्रतिभा त्रिवेदी, अंजलि चौधरी, भावना राठौर, पूनम बघेल, रजत शुक्ला, श्रीमती ममता कुमारी, श्रीमती प्रगति शर्मा, रेखारानी, डाॅ करूणेश उपाध्याय, उमाशंकर पुरोहित, श्रीकृष्ण गौतम, कृष्ण कुमार मिश्रा, हेमंत कुमार, ब्रजेश कुमार, करवेंद्र सिंह, जुगल शर्मा, गोपाल शर्मा, शिवम शुक्ला, गोपनंदन झा, अशोक दीक्षित, महेंद्र सिंह, रमेशचंद्र, रामप्रताप एवं विनोद झा आदि अनेक जन उपस्थित रहे।

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